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डेगाना कांग्रेस की हार पर हरिश भुकर का बड़ा बयान, गुटबाजी और टिकट वितरण पर उठाए सवाल

📅 29 Sep 2026🕐 07:53 AM ✍️ रिपोर्टर: KRISHNA BAGADWA

डेगाना नगर पालिका में कांग्रेस की हार पर हरिश भुकर का बड़ा बयान, बोले—वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और गुटबाजी से हुआ नुकसान

डेगाना न्यूज़ | डेगाना, नागौर | राजनीतिक विशेष रिपोर्ट

डेगाना (नागौर)। डेगाना नगर पालिका चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने और कांग्रेस के नौ सीटों पर सिमटने के बाद अब पार्टी के भीतर टिकट वितरण, वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और गुटबाजी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरिश भुकर ने डेगाना न्यूज़ को दिए विशेष साक्षात्कार में स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि पार्टी ने समय रहते अपने पुराने नेताओं, समर्पित कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को साथ नहीं लिया, तो आगामी पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों में भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से डेगाना के राजनीतिक हालात पर गंभीरता से विचार करने और स्थानीय नेताओं के साथ बैठकर विवादों का समाधान करने की मांग की।

नगर पालिका चुनाव में भाजपा को 13, कांग्रेस को 9 सीटें

डेगाना नगर पालिका के 25 वार्डों के चुनाव परिणामों में भाजपा ने 13 सीटें हासिल कर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। कांग्रेस को 9 सीटें मिलीं, जबकि 3 निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आए। इसके बाद भाजपा की ओर से राधाकिशन बेंदा नगर पालिका चेयरमैन बने।

चुनाव से पहले शहर में भाजपा के प्रति नाराजगी की चर्चाएं थीं। वहीं कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर भी पार्टी के भीतर असंतोष सामने आया था। इसके बावजूद कांग्रेस अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

हरिश भुकर ने कहा कि कांग्रेस की हार के पीछे प्रमुख कारण आपसी सामंजस्य की कमी और वरिष्ठ नेताओं की राय को महत्व नहीं देना रहा। उनके अनुसार, पार्टी को टिकट वितरण के दौरान सभी स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ बैठाकर उम्मीदवारों का चयन करना चाहिए था।

वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी को बताया नुकसान का कारण

हरिश भुकर ने कहा कि डेगाना में कांग्रेस के कई पुराने नेता और कार्यकर्ता लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। इनमें रिजामपाल, रामलाल डेगाना गांव, लालाराम कुलरिया, पांगीलाल मान, हनुमान सिंह जाखेड़ा, रामनिवास सांजू, हरिराम बाजवासी, सर्वण बाजवासी, रामचंद्र नेता और अन्य वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन नेताओं की स्थानीय स्तर पर पकड़ और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

भुकर के अनुसार, पार्टी में नए नेताओं को आगे बढ़ाना गलत नहीं है, लेकिन पुराने नेताओं को किनारे करके संगठन मजबूत नहीं किया जा सकता। जिन लोगों ने वर्षों तक कांग्रेस की विचारधारा के लिए काम किया है, उनकी राय और सम्मान दोनों जरूरी हैं।

उन्होंने दासराम जी गेड़दा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा राजनीतिक जीवन कांग्रेस में बिताया और स्वतंत्र रूप से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की। इसके बावजूद ऐसे वरिष्ठ नेताओं को पर्याप्त तवज्जो नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी पैदा होती है।

निर्दलीय प्रत्याशियों को बताया कांग्रेस विचारधारा से जुड़ा

नगर पालिका चुनाव में तीन निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत को लेकर हरिश भुकर ने कहा कि उनके अनुसार कुछ निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े हुए थे और उन्होंने कांग्रेस से संबंधित मुद्दे उठाए थे।

उन्होंने नासिर वकील के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर होना संगठन के लिए चिंता का विषय है।

उनका कहना था कि पार्टी को चुनाव से पहले ही आपसी विवादों को सुलझाना चाहिए था। यदि सभी नेता और कार्यकर्ता एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते, तो कांग्रेस की स्थिति बेहतर हो सकती थी।

नागौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष हनुमान बांगड़ा के विरोध का मुद्दा उठाया

हरिश भुकर ने नागौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष हनुमान बांगड़ा को लेकर स्थानीय स्तर पर सामने आ रही नाराजगी का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि यदि किसी पदाधिकारी के खिलाफ जनता या कार्यकर्ता शिकायत कर रहे हैं, तो प्रदेश नेतृत्व को उन शिकायतों पर संज्ञान लेना चाहिए और तथ्यों के आधार पर जांच करवानी चाहिए।

भुकर ने कहा कि वे स्वयं किसी प्रकार का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जनता के बीच यदि नाराजगी है तो उसके कारणों को समझना जरूरी है।

उन्होंने भ्रष्टाचार से संबंधित लगाए जा रहे आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। प्रदेश नेतृत्व को संबंधित लोगों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति जाननी चाहिए।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि स्थानीय असंतोष दूर नहीं किया गया, तो डेगाना में कांग्रेस के कार्यक्रमों के दौरान विरोध की स्थिति बन सकती है।

कांग्रेस के दो गुटों में बंटने और एक-दूसरे को हराने के आरोप

नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी पर चर्चा करते हुए हरिश भुकर ने कहा कि उनके अनुसार चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय थे।

उन्होंने सीताराम बिंदा, गिरधारी मुंडेल, अरुण रशीद और अन्य स्थानीय नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सभी नेता एक साथ बैठकर चुनाव लड़ते, तो परिणाम अलग हो सकते थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि आपसी मतभेदों और राजनीतिक खींचतान के कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ। प्रकाश जी के चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए भी उन्होंने पार्टी के अंदरूनी विवादों को जिम्मेदार बताया।

हालांकि, सीताराम बिंदा के संबंध में हरिश भुकर ने स्पष्ट कहा कि उनके अनुसार उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ काम नहीं किया। उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव में गिरधारी मुंडेल को वोट दिया था। भुकर ने कहा कि केवल इस आधार पर उनके खिलाफ आरोप लगाना उचित नहीं होगा और यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए।

उन्होंने स्वयं को कांग्रेस का पक्षधर बताते हुए कहा कि पार्टी के हित में सच्चाई और तथ्यों के आधार पर बात करना जरूरी है।

आरएलपी के प्रभाव को भी बताया कांग्रेस के लिए चुनौती

हरिश भुकर ने कहा कि डेगाना विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के सामने केवल भाजपा की चुनौती नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) का भी ग्रामीण क्षेत्रों में अपना जनाधार है।

उनके अनुसार, कांग्रेस को पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों की तैयारी करते समय स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखना होगा।

उन्होंने अनुसूचित जाति और मुस्लिम समाज के वरिष्ठ नेताओं को संगठन में सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन समाजों के कई नेता लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उनका राजनीतिक अनुभव रहा है।

भुकर के अनुसार, इन नेताओं को साथ लेकर चलना और उनकी राय को महत्व देना आगामी चुनावों के लिए जरूरी होगा।

प्रदेश नेतृत्व से डेगाना में बैठक कर विवाद सुलझाने की मांग

हरिश भुकर ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश प्रभारी रंधावा सहित वरिष्ठ नेताओं से डेगाना के स्थानीय राजनीतिक हालात पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि प्रदेश नेतृत्व को डेगाना में बैठक आयोजित करने से पहले स्थानीय वरिष्ठ नेताओं, पुराने कार्यकर्ताओं और असंतुष्ट पदाधिकारियों के साथ बातचीत करनी चाहिए।

उनका कहना था कि केवल कार्यक्रम आयोजित करने से संगठन मजबूत नहीं होगा, बल्कि कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों से पहले कांग्रेस ने संगठनात्मक एकता स्थापित नहीं की, तो नगर पालिका चुनाव जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है।

पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती

डेगाना नगर पालिका चुनाव के परिणामों के बाद अब पंचायत समिति, जिला परिषद और सरपंच चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय संगठन में एकजुटता कायम करने और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की होगी।

हरिश भुकर के साक्षात्कार ने डेगाना कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका, सामाजिक प्रतिनिधित्व और गुटबाजी जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अब देखना होगा कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और आगामी पंचायत चुनावों से पहले स्थानीय संगठन में किस प्रकार समन्वय स्थापित किया जाता है।

वीडियो रिपोर्ट: डेगाना न्यूज़ के संवाददाता इलियास मोहम्मद खान ने कैमरे के साथ हरिश भुकर से बातचीत की।


नोट: यह समाचार हरिश भुकर द्वारा दिए गए साक्षात्कार पर आधारित है। इसमें व्यक्त आरोप और राजनीतिक विचार उनके अपने कथन हैं। संबंधित अन्य नेताओं और पदाधिकारियों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।